09-Dec-2021 03:55 PM
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शादियों का सीजन शुरू होते ही लोग बैंकेट हॉल बुक या फिर होटल बुक करना शुरू कर देते हैं। इससे शादी का खर्चा काफी बढ़ जाता है, जिसे चुकाने में कई साल लग जाते हैं। हालांकि, कुछ ऐसे लोग हैं, जो मंदिर में शादी करना पसंद करते हैं। दरअसल, आज भी कई ऐसे लोग हैं, जिन्हें बिना किसी तामझाम के साधारण तरीके से शादी करना पसंद है। इसके लिए बेस्ट है मंदिर में शादी करना, जहां कुछ ही लोगों को आने की अनुमति होती हैं। यही नहीं कई बार इन मंदिरों में सामूहिक विवाह का भी आयोजन किया जाता है।
वैसे तो बनारस में कई मंदिर हैं, जहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। आपको मंदिर के प्रांगण में कई ऐसे नव जोड़े शादी करते नजर भी आ सकते हैं। हालांकि, बनारस के इन मंदिरों में शादी करने से पहले जानकारी लेना बेहद आवश्यक है। दरअसल, यह मंदिर हमेशा दर्शन करने आने वाले लोगों से भरी रहती है। ऐसे में किस वक्त आकर शादी करना सही है यह जानकारी आपको मंदिर के कर्मचारियों से लेनी होगी। तो चलिए जानते हैं इन मंदिरों के बारे मे
संकट मोचन मंदिर
बनारस का संकटमोचन मंदिर काफी मशहूर है। मंगलवार और शनिवार को यहां श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ देखने को मिलती हैं। यहां लोग आकर शादी करते हैं, लेकिन उन्हें भीड़ जुटाने की अनुमति नहीं होती है। दूल्हा और दुल्हन के परिवार के अलावा वहां अधिक लोगों को इकट्ठा होने की इजाजत नहीं होती। मंदिर के पीछे वाले हिस्से में कई कमरे बनाए गए हैं, जहां शादी के लिए तैयारियां की जाती है। हालांकि, ज्यादातर वहां स्थानीय लोग आकर शादी करते हैं। बता दें कि 2006 में संकट मोचन में धमाका हुआ था, जिसके बाद से मंदिर की सुरक्षा को लेकर सख्त नियम कर दिए गए हैं। इसलिए जिन भी लोगों को शादी करना हो, उन्हें पहले मंदिर के कर्मचारियों से इजाजत लेनी होती है। मंदिर में पंडित और पूजा की व्यवस्था तुरंत हो जाती हैं। वहीं कई लोग शादी के तुरंत बाद जोड़े को रूप में दर्शन के लिए आते हैं। इस मंदिर भगवान हनुमान को लेकर खास आस्था है।
दुर्गा कुंड मंदिर
बनारस का दुर्गा कुंड मंदिर प्राचीन मंदिरों में से एक है। मां दुर्गा को समर्पित इस मंदिर में लोगों की भीड़ अक्सर देखने को मिलती है, लेकिन नवरात्रि के समय इस मंदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है।दुर्गा कुंड में लोग शादी करने के लिए आते हैं। दरअसल, इस मंदिर के दूसरे साइड एक खास स्थान बनाया गया है, जहां हवन या फिर शादी जैसे कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। शादी हो जाने के बाद नव जोड़ा मां दुर्गा के दर्शन करता है। हालांकि, यह मंदिर अन्य मंदिरों की तुलना में काफी छोटा है, जहां श्रद्धालुओं की भीड़ हमेशा देखने को मिलती है। ऐसे में शादी जैसे कार्यक्रम सुबह में किए जाते हैं, क्योंकि रात में रुकने या फिर ठहरने की व्यवस्था नहीं होती। बनारस के इन मंदिरों में शादी हो जाने के बाद लोग अपने-अपने घर चले जाते हैं और बाकी रस्में वहीं करते हैं।
कर्दमेश्वर महादेव मन्दिर
भगवान भोलेनाथ को समर्पित यह मंदिर खास लोकप्रिय नहीं है। काशी की धार्मिक और महत्वपूर्ण पंचकोशी यात्रा के दौरान श्रद्धालु यहां विश्राम करते हैं। यह उनके लिए एक विश्राम स्थल है। मंदिर के साथ-साथ यहां एक कुंड भी है, जिसका इतिहास काफी पुराना है। त्योहार और खास उत्सव के वक्त यहां रौनक देखने को मिलती हैं। वहीं महादेव का मंदिर होने की वजह से आसपास के लोग शादी जैसे कार्यक्रम भी यहां आयोजित करते हैं। दरअसल, मंदिर का प्रांगण काफी बड़ा है, और आसपास कई गेस्ट हाउस भी हैं। पंडित और परिवार के लोगों के बीच यहां लोग शादी करते है। यह मंदिर गढ़वाल राजाओं की विशिष्ट धरोहर है। खास बात है कि यह मंदिर पंचरथ शैली में बना है। इस मंदिर में एक ही चबूतरा है, जिस पर गर्भगृह, प्रदक्षिणा पथ, अंतराल, महामंडप और अर्धमंडप स्थापित है।
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