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महाकुंभनगर,27 जनवरी (संवाददाता) महाकुंभ में सोमवार को धर्म संसद की बैठक में सनातन धर्म की रक्षा के लिए संतों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सनातन बोर्ड बनाने की अपील की।
प्रख्यात कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर की अध्यक्षता में शांति सेवा शिविर संगम लोअर मार्ग सेक्टर 17 में आयोजित धर्म संसद में तमाम संतो ने सनातन बोर्ड के गठन और वक्फ बोर्ड को समाप्त करने की वकालत की गयी। संतो ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से संसद में वर्शिप एक्ट को खत्म करने की भी मांग की। उन्होंने कहा “ हम इस संबंध में सरकार को मांग पत्र भी भेज रहे हैं।” धर्म संसद में नारा दिया गया “संभल, मथुरा, विश्वनाथ, तीनों लेंगे एक साथ।” वर्शिप एक्ट के अनुसार, 15 अगस्त 1947 से पहले जो धार्मिक स्थल जिस रूप में था या है, वह उसी रूप में रहेगा। उसे नहीं बदला जा सकेगा।
संतो ने कहा कि अधिनियम प्रस्ताव भारत में हिंदू मंदिरों, संपत्तियों के संरक्षण के लिए सनातन बोर्ड बनाया जाएगा। ये बोर्ड स्वतंत्र निकाय के रूप में स्थापित किया जाएगा। मंदिरों में पूजा पद्धति की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। देश के चारों शंकराचार्य को प्रमुख संरक्षक नियुक्त किया जाएगा।
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदू बोर्ड नहीं है तो हिंदुस्तान में वक्फ बोर्ड की क्या जरुरत है। उन्होंने कहा, “बहुत सह लिया, अब न सहेंगे। अपना हक लेकर रहेंगे। पाकिस्तान छोड़कर जो हिंदू आए थे, उनकी जगह कहां गई। पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदू बोर्ड नहीं है तो हिंदुस्तान में वक्फ बोर्ड क्या कर रहा है।” अखाड़ों द्वारा धर्म संसद के बहिष्कार के सवाल पर देवकीनंदन ठाकुर ने कहा, “ लोगों में चर्चाएं थीं कि मैं सनातन बोर्ड का अध्यक्ष बनना चाहता हूं, इसलिए ये सब कर रहा हूं। आज मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मुझे कोई पद प्रतिष्ठा नहीं चाहिए। मैं शपथ खाकर कहता हूं कि मुझे कोई पद की इच्छा नहीं थी। मैं तो बस सनातन की रक्षा चाहता हूं।”
देवकीनंदन ठाकुर ने एक शपथ पत्र भी जगद्गुरु श्रीजी महाराज और जगद्गुरु विद्या भास्कर को सौंपा, जिसमें उन्होंने सनातन बोर्ड में कोई भी पद नहीं लेने की बात दोहराई है।
कथावाचक ठाकुर ने कहा “ सबसे पहले वक्फ बोर्ड ने कुंभ वाली जगह को अपनी जमीन बताई। हमको डर है कि कहीं वक्फ बोर्ड ऐसा न कह दे कि पूरा भारत ही हमारा है। उस दिन हमारा क्या होगा। कौन सा ऐसा देश है जो हमें शरण देगा। सिर्फ भारत है, जहां हिंदू जा सकते हैं। अब पूरे भारत को वक्फ बोर्ड को देने की कोशिशें हो रही हैं। हिंदुस्तान में वक्फ बोर्ड क्या कर रहा है।”
उन्होंने कहा “ इस बार पूरी कैबिनेट ने संगम में डुबकी लगाई, ऐसा इससे पहले नहीं हुआ। वर्ष 2013 में समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार ने आजम खान को कुंभ की कमान दे दी थी, जो हमको 15 मिनट का वक्त देते हैं। हम कहते हैं कि तुम 15 मिनट ही देकर देख लो। हमारे नागा साधु ही काफी हैं। आपके अरमान हमारे नागा साधु ठंडा कर देंगे।”
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि अगर वक्फ बोर्ड कायदे में रहे तो फायदे में भी रहे। पर जब कायदे में नहीं रहोगे तो हम नहीं रहने देंगे। बच्चों का विवाह सनातनी परिवार में ही होनी चाहिए। सनातन पर आघात हुआ है। हिंदू, सनातन संस्कृति को नष्ट करने के लिए सबसे बड़ी योजना मैकाले की थी। उसने संस्कृत हटाकर शिक्षा में अंग्रेजी को महत्ता दी। संस्कार विहीन समाज कभी देश का भला नहीं कर सकता। वो संस्कार हमारे संत महात्मा, जगद्गुरु देते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर सनातन बोर्ड बना तो हर मंदिर में गोशाला बनेगी। गाय सड़क पर नहीं दिखेंगी। गोशाला में उनकी सेवा होगी। मंदिर के पैसे से गुरुकुल बनाएंगे, औषधालय बनाएंगे। नर की सेवा नारायण की संपत्ति से होगी।
धर्म संसद में जगद्गुरु राघवाचार्य ने कहा कि सनातन बोर्ड सरकारी नहीं होना चाहिए। अगर वो सरकारी बना तो उसका कोई मतलब नहीं रह जाएगा। उस बोर्ड में आचार्य होने चाहिए। उस बोर्ड के द्वारा सनातन धर्म का संरक्षण और संवर्धन हो। जब देश का बंटवारा धर्म के नाम पर हुआ तो सारे मुसलमान पाकिस्तान चले जाएं। पूरी धरती ही सनातनी धर्मावलंबियों की है। आज जहां जहां खुदाई हो रही है, वहां हमारे मंदिरों के प्रमाण मिल रहे हैं।
चिन्मयानंद बापू ने कहा,“ जिस महाकुंभ में हम बैठे हैं, कुछ मूर्खों ने उस धरती पर भी वक्फ बोर्ड का दावा ठीक दिया। ये सनातन बोर्ड बहुत पहले हो जाना चाहिए था। जब देश का बंटवारा हुआ तो एक बड़ा षड्यंत्र रचा गया। जिनके चार थे, उन्होंने तीन को पाकिस्तान भेज दिया और एक भारत में रहने दिया, ताकि संपत्ति काबिज रहे। प्रधानमंत्री ने 2016 में जब ऐसी संपत्तियों को लेकर नियम बनाया तो विधर्मियों ने वो संपत्ति वक्फ बोर्ड को दान दे दी। ऐसी स्थितियों में सनातन बोर्ड जरूरी है।”
निंबार्क पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य श्रीराम श्यामचरण श्रीजी महाराज, जगद्गुरु राघवाचार्य, जगद्गुरु वल्लभाचार्य, महंत राजू दास, साध्वी प्राची, महंत राजू दास, साध्वी सरस्वती, जगद्गुरु सूर्याचार्य सहित तमाम संतो ने सनातन बोर्ड के गठन पर जोर दिया।
धर्म संसद में प्रमुख प्रस्ताव, सनातन बोर्ड लागू किया जाए, देशभर के मंदिरों से सरकारी नियंत्रण हटे, हर बड़े मंदिर में गोशाला स्थापित हो, धर्मांतरण रोकने के लिए गरीब हिंदू परिवारों को आर्थिक सहायता देना, सनातन हिंदुओं के दूसरे धर्म में विवाह रोकने का प्रयास करना, 'भगवान को क्या भोग लगेगा, ये जिलाधिकारी नहीं तय करेंगे। धर्म संसद की बैठक में 13 अखाडों से शिरकत नहीं की।...////...