छह नामों से जानी जाती थीं मीना कुमारी
31-Mar-2025 03:17 PM 1115
..पुण्यतिथि 31 मार्च के अवसर पर .. मुंबई,31 मार्च (संवाददाता) अपने संजीदा अभिनय से दर्शकों के दिलों को छू लेने वाली महान अदाकारा मीना कुमारी रील लाइफ में ‘ट्रेजडी क्वीन’ के नाम से मशहूर हुयी लेकिन रियल लाइफ में वह छह नामों से जानीं जाती थीं। मुंबई मे एक अगस्त 1932 को एक मध्यम वर्गीय मुस्लिम परिवार में मीना कुमारी का जब जन्म हुआ तो पिता अलीबख्श और मां इकबाल बानो ने उनका नाम रखा ‘माहजबीं’। बचपन के दिनो में मीना कुमारी की आंखे बहुत छोटी थी इसलिये परिवार वाले उन्हें चीनी कहकर पुकारा करते थे। ऐसा इसलिये कि चीनी लोगों की आंखे छोटी हुआ करती हैं। लगभग चार वर्ष की उम्र में ही मीना कुमारी ने फिल्मों में अभिनय करना शुरू कर दिया। प्रकाश पिक्चर के बैनर तले बनीं विजय भट्ट निर्देशित फिल्म लेदरफेस में उनका नाम रखा गया बेबी मीना। इसके बाद मीना ने बच्चों का खेल में बतौर अभिनेत्री काम किया। इस फिल्म में उन्हें मीना कुमारी का नाम दिया गया। मीना कुमारी को फिल्मों अभिनय करने के अलावा शेरो-शायरी का भी बेहद शौक था। इसके लिये वह नाज उपनाम का इस्तेमाल करती थी। वर्ष 1952 मे मीना कुमारी को विजय भटृ के निर्देशन में ही बैजू बावरा मे काम करने का मौका मिला। फिल्म की सफलता के बाद मीना कुमारी बतौर अभिनेत्री फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने मे सफल हो गई।वर्ष 1952 मे मीना कुमारी ने फिल्म निर्देशक कमाल अमरोही के साथ शादी कर ली।वर्ष 1962 मीना कुमारी के सिने कैरियर का अहम पड़ाव साबित हुआ। इस वर्ष उनकी आरती,मै चुप रहूंगी,और साहिब बीबी और गुलाम जैसी फिल्में प्रदर्शित हुई। इसके साथ हीं इन फिल्मों के लिये वह सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार के लिये नामित की गई। यह फिल्म फेयर के इतिहास मे पहला ऐसा मौका था, जहां एक अभिनेत्री को फिल्म फेयर के तीन नामांकन मिले थे। वर्ष 1964 में मीना कुमारी और कमाल अमरोही की विवाहित जिंदगी मे दरार आ गई। इसके बाद मीना कुमारी और कमाल अमरोही अलग अलग रहने लगे। कमाल अमरोही की फिल्म ..पाकीजा ..के निर्माण में लगभग चौदह वर्ष लग गए। कमाल अमरोही से अलग होने के बावजूद मीना कुमारी ने शूटिंग जारी रखी क्योंकि उनका मानना था कि पाकीजा जैसी फिल्मों में काम करने का मौका बार बार नहीं मिल पाता है। मीना कुमारी के करियर में उनकी जोड़ी अशोक कुमार के साथ काफी पसंद की गई। मीना कुमारी को उनके बेहतरीन अभिनय के लिये चार बार फिल्म फेयर के सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार से नवाजा गया है। इनमें बैजू बावरा,परिणीता, साहिब बीबी और गुलाम और काजल शामिल है। मीना कुमारी यदि अभिनेत्री नहीं होती तो शायर के रूप में अपनी पहचान बनाती। हिंदी फिल्मों के जाने माने गीतकार और शायर गुलजार से एक बार मीना कुमारी ने कहा था , ये जो एक्टिग मैं करती हूं उसमें एक कमी है .ये फन. ये आर्ट मुझसे नही जन्मा है ख्याल दूसरे का .किरदार किसी का और निर्देशन किसी का। मेरे अंदर से जो जन्मा है .वह लिखती हूं जो मैं कहना चाहती हूं वह लिखती हूं।मीना कुमारी ने अपनी वसीयत में अपनी कविताएं छपवाने का जिम्मा गुलजार को दिया जिसे उन्होंने ..नाज..उपनाम से छपवाया।सदा तन्हा रहने वाली मीना कुमारी ने अपनी रचित एक गजल के जरिये अपनी जिंदगी का नजरिया पेश किया है. .. चांद तन्हा है आसमां तन्हा दिल मिला है कहां कहां तन्हा राह देखा करेगा सदियों तक छोड़ जायेगें ये जहां तन्हा .. अपने संजीदा अभिनय से दर्शको के दिल पर राज करने वाली मीना कुमारी 31 मार्च 1972 को अलविदा कह गयी।मीना कुमारी के करियर की अन्य उल्लेखनीय फिल्में है..आजाद,एक हीं रास्ता,यहूदी,दिल अपना और प्रीत पराई,कोहीनूर,दिल एक मंदिर,चित्रलेखा,फूल और पत्थर,बहू बेगम,शारदा,बंदिश,भींगी रात,जवाब,दुश्मन आदि।...////...
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