14-Dec-2021 12:30 PM
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इंदौर। तीन हजार किलोमीटर लंबाई में बहने वाली नर्मदा नदी मेें इस साल 11प्रतिशत पानी कम हैै। इस वजह से नदी पर बने छोटे बांध तो लबालब है, लेकिन बड़े बाध पूरी क्षमता से नहीं भर पाए। नदी पर बने सबसे बड़े सरदार सरोवर बांध में भी इतना पानी एकत्र नहीं हो पाया कि सालभर उससे बिजली पैदा हो सके। पिछले दिनों दिल्ली में हुई बैठक में तय हुआ था कि फसलों के लिए मध्य प्रदेश को नवबंर और दिसंबर तक बिजली दी जाए। इस मांग पर अमल हुआ और 20 दिसंबर तक प्रदेश को बांध से बिजली देने का फैसला हुआ है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों के बिजली मिल सके। नर्मदा नदी में वर्षभर 28 मिलियए एकड़ फुट (एमएएफ) प्रवाह होना चाहिए, लेकिन इस साल बारिश कम होने के कारण 24 एमएएफ पानी ही नर्मदा में मौजूद है। नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण के अनुसार इस कारण बरगी अौर तवा डेम तो पूरी तरह भर गए, लेकिन इंदिरा सागर बांध 75 प्रतिशत और सरदार सरोवर बांध 62 प्रतिशत ही भर पाया। इंदौर में यातायात पुलिस पर कमिश्नरी प्रणाली का असर तय शर्त के अनुसार बांध से उत्पन्न बिजली का 75 प्रतिशत मध्य प्रदेश को , 27 प्रतिशत महाराष्ट्र को और 16 प्रतिशत हिस्सा गुजरात को मिलता है, लेकिन बांध में फिलहाल 128 मीटर तक पानी भरा है, जबकि बांध की क्षमता 138 मीटर है। बांध से 1200 मेगावाट बिजली उत्पन्न होती है। जिसमे से करीब 700 मेगावाट बिजली मध्य प्रदेश को मिलती है, लेकिन तीन साल से पर्याप्त पानी नहीं होने से विद्युत ताप इकाईयां भी पूरी क्षमता से नहीं चल पाती है। चार साल पहले 40 प्रतिशत खाली रही थी नर्मदा वर्ष 2017 में नर्मदा में 17 एमएफए पानी ही नर्मदा में था। तब 15 साल बाद ऐसी सि्थति निर्मित हुई थी। नर्मदा तट से जुड़े इलाकों में कम बारिश होने के कारण कई हिस्सों मेें तो नदी काफी संकरी हो गई थी। नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के फैसले के अनुसार नदी में वर्षभर प्रवाह कायम रखने के लिए 8 एमएफ पानी छोड़ना आवश्यक है,ताकि पेयजल और सिंचाई के लिए पानी मिल सके। अभी भी इतना पानी बांधों से नदी में छोड़ा जा रहा है।
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